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90 फीसदी बसों का परमिट सरेंडर। परिवहन विभाग को पांच लाख तो संचालकों को भी हुआ लाखों का नुकसान।

महासमुंद(छत्तीसगढ़)परिवहन विभाग में अब तक 262 बस संचालकों ने लॉकडाउन के बीच वाहन नहीं चलने पर होने वाले नुकसान से बचने आई फार्म सरेंडर किया है। इससे परिवहन विभाग को करीब पांच लाख रुपए के राजस्व का नुकसान हुआ है। जबकि बसों के न चलने से संचालकों को भी लाखों रुपए का नुकसान हुआ है।परिवहन विभाग की मानें तो जिले में संचालित बसों में से 90 फीसदी वाहनों के संचालकों ने आई फार्म सरेंडर किया है। शेष बसें ऐसी है जिन्होनें संरेडर नहीं किया है। जिला परिवहन अधिकारी मोहनलाल साहू ने बताया कि मार्च में लॉकडाउन के पूर्व 97 और अप्रैल माह के अंत तक 165 बसों के संचालकों ने आई फार्म सरेंडर किया है। ज्ञात हो कि राजधानी रायपुर में लॉकडाउन होने के बाद रायपुर रुट पर चलने वाली करीब 70 बसें बंद हो गई। इस दौरान जिला अनलॉक था लेकिन संक्रमण के खतरे और सवारियों के अभाव में अधिकांश संचालकों ने बसों का संचालन बंद कर दिया और परमिट टैक्स के खर्च से बचने के लिए विभाग को आई फार्म जमा कर दिया।पांच।लाख रुपए राजस्व का घाटा
जिला परिवहन अधिकारी मोहन लाल ने बताया कि बड़ी संख्या में आई फार्म सरेंडर होने से विभाग को करीब पांच लाख रुपए के राजस्व का नुकसान हुआ है। जब अनलॉक नहीं होगा और बसों का संचालन शुरु नहीं होगा तब तक आई फार्म जमा रहने से शासन को बसों से परमिट टैक्स के रूप में मिलने वाले राजस्व का नुकसान होगा।
मुश्किल से पटरी पर लौटा था कारोबार
जिला बस एसोसिएशन अध्यक्ष राकेश चंद्राकर ने बताया कि पिछले वर्ष हुए लॉकडाउन के बाद बसों का संचालन जुलाई माह में शुरु हुआ। करीब चार माह की कोशिशों के बाद बस कारोबार दिसंबर में पटरी पर लौटा था। लेकिन मार्च में संक्रमण का खतरा बढ़ा और कारोबार पूरी तरह ठप्प हो गया। अप्रैल में सर्वाधिक शादियां थी जिसकी बुकिंग भी हो चुकी थी। लेकिन लॉकडाउन और शासन के निर्देश के तहत संख्या सीमित होने के बाद बुकिंग भी कैंसल हो गई। पिछली बार की तरह इस बार सभी बस संचालकों को लाखों रुपए का नुकसान हुआ है। अब कब तक लॉकडाउन रहेगा यह भी तय नहीं है।

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