IBN24 Desk : रायपुर (छत्तीसगढ़) छत्तीसगढ़ के वन विभाग में एक अजीब घटना घटी । वन मंडल में बैठे एक कनिष्ठ अधिकारी ने मंत्रालय में सचिव पद पर असीन वरिष्ठ अधिकारी को बहुत ही अभद्र शब्दों के साथ संबोधित कर दिया। मामले मे मंत्रालय प्रशासन ने देर से ही सही, मगर 15 दिन बाद कनिष्ठ अधिकारी को निलंबित कर दिया। जाहिर है वरिष्ठ अधिकारी बहुत इज्जतदार रहा होगा। वैसे यह कोई नई बात नहीं है जिले में बैठे अधिकारियों पर इतना अधिक प्रेशर रहता है कभी वीसी का कभी विधानसभा जानकारी का तो कभी ऑडिट का , बाकी मुख्यालय मीटिंगों के भाग दौड़ का । स्थानीय नेताओं पत्रकारों जनप्रतिनिधियों से आए दिन नोक झोंक , सो अलग । पता नहीं कश्यप उस दिन किस प्रेशर में रहा होगा पर एक बात तो तय है वन विभाग में निलंबित करने के क्राइटेरिया कर्मचारियों अधिकारियों के लिए अलग-अलग हैं । वरिष्ठ को गाली दो तो निलंबन निश्चित और कनिष्ठ कर्मचारी का शोषण करो तो वरिष्ठ अधिकारियों का संरक्षण । हम बात कर रहे हैं बलौदा बाजार वन मंडल के अंतर्गत कसडोल सब डिवीजन की । यहां पदस्थ एक रेंजर सुनीत साहू ने अपने मातहत मैदानी कर्मचारियों को आए दिन पता नहीं कौन-कौन सी गालियां दी जलील किया , यहां तक कि वन कर्मचारी संघ भी एक लंबी लड़ाई उसके विरुद्ध लड़ गया । मगर इस बार वन विभाग का पूरा अमला लगा हुआ है उस दोषी रेंजर को बचाने । इस सुनीत साहू के विरुद्ध पहले जांच संस्थित की गई वन मंडल स्तर पर और जांच रिपोर्ट को रद्दी की टोकरी में डाल दिया गया । इसके बाद जब वन कर्मचारी संघ ने आवाज उठाई तो वन संरक्षक ने अन्य डिवीजन के तीन उप वन मंडल अधिकारियों की टीम बनाकर फिर से जांच शुरू की मगर नतीजा अब तक सिफर है उपवन मंडल अधिकारी यू आर बसंत के नेतृत्व में की गई जांच रिपोर्ट अब तक उनके खींसे से बाहर नहीं निकली है । लिहाजा सुमित साहू के निलंबन की दिशा में अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है और वह गरियाबंद जिले में आराम से अपनी सेवाएं दे रहा है । देखना यह है की गाली गलौज की पुष्टि होने के बाद भी जांच अधिकारी उसको कब तक बचा पाती है ।
