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धमतरी जिले के खरतुली गांव के 38 वर्षीय किसान मोहित पवार ने पुणे से एमबीए करने के बाद निजी कंपनियों के नौकरी प्रस्ताव ठुकराकर खेती को चुना

IBN24 Desk:धमतरी (छत्तीसगढ़) धमतरी जिले के खरतुली गांव के 38 वर्षीय किसान मोहित पवार ने पुणे से एमबीए करने के बाद निजी कंपनियों के नौकरी प्रस्ताव ठुकराकर खेती को चुना। वह एक एकड़ पैतृक जमीन पर हाईटेक तरीके से डच गुलाब की व्यावसायिक खेती कर रहे हैं। उनके फूलों की आपूर्ति अब छत्तीसगढ़ के साथ ओडिशा और झारखंड के बाजारों तक पहुंच रही है।

मोहित पवार ने बताया कि डच गुलाब की खेती शुरू करने के लिए शुरुआती निवेश 50 से 60 लाख रुपये आंका गया था। पूंजी की जरूरत को देखते हुए उन्होंने बैंक से 65 लाख रुपये का कृषि ऋण लिया। इसके बाद गांव में पॉली हाउस और अन्य जरूरी ढांचा तैयार किया गया। अप्रैल 2025 से खेती शुरू की गई। पहले साल में उन्हें नुकसान भी हुआ।

शुरुआती 4 से 5 महीनों में पौधों के रखरखाव और तकनीकी समझ की कमी के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ। बाद में उन्होंने प्रबंधन और मार्केटिंग रणनीति के जरिए संचालन में सुधार किया। इसके बाद परियोजना घाटे से निकलकर मुनाफे में आ गई।

वर्तमान में पॉली हाउस से रोज औसतन 12 किलो फूल तोड़े जा रहे हैं। इससे प्रतिदिन करीब 1000 से 1500 डंडियां बाजार के लिए तैयार होती हैं। शादी-विवाह और त्योहारों के मौसम में मांग बढ़ने पर पूरा उत्पादन ऊंचे दामों पर बिक जाता है। फूलों को पैक कर रायपुर भेजा जाता है। वहां से आगे अन्य राज्यों में सप्लाई होती है।

मोहित पवार के अनुसार, इस खेती से सालाना 15 से 18 लाख रुपये की कुल आय हो रही है। बैंक ऋण की किस्त, जैविक खाद, रखरखाव, खेत में काम करने वाले 8 स्थानीय मजदूरों की मजदूरी जैसे खर्च निकालने के बाद भी सालाना 13 से 15 लाख रुपये की शुद्ध बचत का दावा किया गया है।

उन्होंने बताया कि खेती को रासायनिक खाद से मुक्त रखा गया है। डच गुलाब के उन्नत पौधे पुणे से मंगाए गए। तापमान नियंत्रित करने वाला पॉली हाउस बनाया गया। सिंचाई के लिए इजरायली ड्रिप सिस्टम लगाया गया है।

इस व्यवस्था में गर्मी के दिनों में भी रोजाना 350 से 400 लीटर पानी से काम चल जाता है। सर्दियों में सप्ताह में एक बार सिंचाई की जरूरत पड़ती है। कम पानी की खपत के कारण गिरते जलस्तर के बीच भी उत्पादन बनाए रखने में मदद मिल रही है।

 

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