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महासमुंद जिले के धान खरीदी केन्द्रो से 17 करोड़ 93 लाख 67 हजार 457 रुपये के धान गायब। गड़बड़ी वाले दो केन्द्र पर कार्यवाही की गई। खरीदी में गड़बड़ी करने वाले 52 धान खरीदी प्रभारियों पर अब तक नहीं हुई कार्यवाही ।  

IBN24 Desk : महासमुंद (छत्तीसगढ़) धान खरीदी वर्ष 2025 – 26 में महासमुंद जिले में धान खरीदी के लिए 182 धान उपार्जन केंद्र बनाए गए थे, जहां जिले के पंजीकृत किसानों से समर्थन मूल्य पर शासन ने धान की खरीदी की। धान खरीदी वर्ष  2025 – 26 में महासमुंद जिले के कई धान उपार्जन केंद्र प्रभारियों ने बड़े पैमाने पर बोगस [ फर्जी ] धान खरीदी दिखाकर फर्जीवाड़ा किया है। धान खरीदी फड़ में बिना धान लाये ही सैकड़ो क्विंटल धान ऑनलाइन खरीदी चढ़ा दिया गया और सर्मथन मूल्य 3100 प्रतिक्विंटल के हिसाब से पैसे भी बैंक से आहरण भी कर लिया गया। फर्जीवाड़ा तब पकड़ में आया जब धान खरीदी के बाद जिला प्रशासन ने धान खरीदी केंद्रों का भौतिक सत्यापन करवाया।
महासमुंद जिले में धान खरीदी वर्ष  2025 – 26 में जिले के 182 धान उपार्जन केंद्र में कुल 10195681.20 मैट्रिक टन की धान खरीदी की गई। राईस मिलरों के माध्यम से 10137820.73 मैट्रिक टन धान का उठाव हुआ। अभी भी 57860.47 क्विंटल उठाव शेष है पर खरीदी केन्द्रो में  धान नहीं है। जिसकी कीमत समर्थन मूल्य 3100 प्रतिक्विंटल के हिसाब से  17 करोड़ 93 लाख 67 हजार 457 रुपये है।
आज की स्थिति में भी जिले के 54 धान उपार्जन केंद्र में ऑनलाइन देखने पर धान होना दिख रहा है जबकि मौके पर धान का एक दाना भी नहीं है।
जिले के टॉप टेन धान खरीदी केंद्र जहाँ पर बड़े पैमाने पर धान का घोटाला किया गया। जिला प्रशासन ने सिर्फ दो खरीदी केंद्र पर कार्यवाही करते हुए FIR करवाया है बाकी 52 गड़बड़ी करने वाले केंद्र प्रभारियों पर कार्यवाही अब तक नहीं हुई है।
1. आरंगी सहकारी समिति में  4437 क्विंटल धान गायब, [ यहाँ FIR हुआ है ] 
2 .बम्हनी सहकारी समिति में  4365 क्विंटल धान गायब  [ यहाँ FIR हुआ है ] 
3. तोषगांव सहकारी समिति 85 लाख 58 हजार 480 रुपये के 2760.80 क्विंटल धान गायब।
4. बढ़ईपाली सहकारी समिति 66 लाख 88 हजार 808 रुपये के 2157.68 क्विंटल धान गायब।
5. मोंगरापाली सहकारी समिति 60 लाख 52 हजार 404 रुपये के 1952.40 क्विंटल धान गायब।
6. सम्हर सहकारी समिति 56 लाख 44 हजार 420 रुपये के 1820.84 क्विंटल धान गायब।
7. कोटद्वारी सहकारी समिति 55 लाख 20 हजार 15 रुपये के 1780.65 क्विंटल धान गायब।
8. मल्दामाल सहकारी समिति 53 लाख 11 हजार 75 रुपये के 1713.25 क्विंटल धान गायब।
9. बेलसोंडा सहकारी समिति 52 लाख 09 हजार 271 रुपये के 1680.41 क्विंटल धान गायब।
10.खेमड़ा सहकारी समिति 48 लाख 09 हजार 960 रुपये के 1551.60 क्विंटल धान गायब।
फर्जीवाड़ा करने वाले के ऊपर समय में कार्यवाही होती नहीं है इसलिए फर्जीवाड़ा करने वालो के हौसलों बुलंद है और हाल साल इस तरीके के फर्जीवाड़ा कर रहे है। इस तरह के फर्जीवाड़े से हर साल किसानो की सहकारी समिति डूब रही है साथ ही शासन को भी भारी नुकसान हो रहा है।
धान खरीदी में गड़बड़ी को रोकने के लिए नोडल अधिकारी, मोनेटरिंग अधिकारी बनाये जाते है लगातार खरीदी समय केन्द्रो में धान खरीदी का भौतिक सत्यापन होता है उसके बाद भी इस तरीके के फर्जीवाड़ होता है आखिर अधिकारी किस तरह की मोनेटरिंग करते है ये शोध का विषय है।
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