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डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन राष्ट्रनिष्ठा, त्याग और संकल्प का प्रेरक उदाहरण : वित्त मंत्री ओपी चौधरी

IBN24 Desk: रायपुर (छत्तीसगढ़) देश की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के प्रखर पुरोधा, प्रखर शिक्षाविद् डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर शहीद नंदकुमार पटेल विश्वविद्यालय में व्याख्यान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रदेश के वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने भारत माता एवं डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर दीप प्रज्वलित किया तथा उनके राष्ट्रनिर्माण में योगदान को नमन किया।

वित्त मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का संपूर्ण जीवन राष्ट्रभक्ति, त्याग, शिक्षा, सिद्धांतों के प्रति अटूट निष्ठा और अदम्य साहस का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने व्यक्तिगत हितों से ऊपर राष्ट्रहित को सर्वोच्च स्थान दिया और भारतीय लोकतंत्र तथा राष्ट्रीय एकता को नई दिशा प्रदान की। उनका जीवन आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा का अक्षय स्रोत है। इस अवसर पर उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के राष्ट्र के प्रति योगदान का भी स्मरण किया। सकारात्मक सोच, स्पष्ट लक्ष्य और अनुशासन ही सफलता की कुंजी

युवाओं को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने कहा कि सफलता केवल प्रतिभा से नहीं, बल्कि स्पष्ट लक्ष्य, अनुशासन, निरंतर परिश्रम और सकारात्मक सोच से प्राप्त होती है। व्यक्ति जैसा सोचता है, वैसा ही बनता है। उन्होंने कहा कि किसी भी निर्णय से पहले उसके परिणामों पर विचार करना चाहिए तथा अपने निर्णयों की जिम्मेदारी स्वयं स्वीकार करनी चाहिए। असफलताओं के लिए दूसरों को दोष देने के बजाय आत्ममंथन और निरंतर सीखने की प्रवृत्ति अपनानी चाहिए। उन्होंने युवाओं से आधुनिकता के साथ अपनी संस्कृति, भाषा और परंपराओं पर गर्व करने का भी आह्वान किया।

युवा संवाद में विद्यार्थियों के सवालों का दिया जवाब

कार्यक्रम के दौरान वित्त मंत्री श्री चौधरी ने विद्यार्थियों के साथ संवाद करते हुए प्रशासनिक सेवा, प्रतियोगी परीक्षाओं, महिला सशक्तिकरण, व्यक्तित्व विकास एवं स्वास्थ्य से जुड़े प्रश्नों के उत्तर दिए। प्रशासनिक सेवा में करियर संबंधी प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि प्रशासनिक सेवा केवल रोजगार नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की सेवा का प्रभावी माध्यम है। इसके लिए दृढ़ संकल्प, अनुशासित अध्ययन और निरंतर परिश्रम आवश्यक है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार अन्य पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को संघ लोक सेवा आयोग की तैयारी के लिए विशेष योजना के तहत दिल्ली भेज रही है, जिससे उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा का बेहतर अवसर मिल सके।

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पर उन्होंने कहा कि सफलता के लिए लक्ष्य स्पष्ट होना चाहिए। समय का सदुपयोग, गुणवत्तापूर्ण अध्ययन, आत्मअनुशासन और निरंतर प्रयास ही सफलता की कुंजी हैं। उन्होंने अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियां भी मजबूत संकल्प रखने वाले व्यक्ति की राह नहीं रोक सकतीं।

बेटियों को आगे बढ़ने के लिए अवसरों का लाभ उठाना होगा

महिला सशक्तिकरण पर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में वित्त मंत्री ने कहा कि बेटियों की शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार और नेतृत्व क्षमता को बढ़ावा देने के लिए सरकार अनेक योजनाएं संचालित कर रही है। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि बेटियां आत्मविश्वास के साथ उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाते हुए अपने सपनों को साकार करें।

स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन सफलता की पहली शर्त

स्वास्थ्य संबंधी प्रश्नों का उत्तर देते हुए श्री चौधरी ने युवाओं को नियमित दिनचर्या, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और व्यायाम अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन ही किसी भी बड़ी सफलता की पहली शर्त हैं।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. विनय चौहान, महापौर श्री जीवर्धन चौहान, जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती हेमलता चौहान, नगर निगम सभापति श्री डिग्री लाल साहू, कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री शशिमोहन सिंह, विश्वविद्यालय के प्राध्यापक, छात्र-छात्राएं एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय सेवा योजना के उत्कृष्ट स्वयंसेवकों को सम्मानित किया गया तथा विश्वविद्यालय परिवार द्वारा अतिथियों का शाल, श्रीफल एवं स्मृति चिन्ह भेंटकर अभिनंदन किया गया।

 

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