IBN24 Desk : महासमुंद (छत्तीसगढ़) महासमुंद जिला फर्जीवाड़ा, भष्ट्राचार का महासमुन्द्र है यहाँ हर रोज नित नए फर्जीवाड़ा उजागर होता है। ताजा मामला महासमुंद जिले के सराईपाली ब्लाक के सेवा सहकारी समिति केना का है जहाँ किसानो के रकबा में कूट रचना कर उनके रकबे को फर्जी ढंग से बढ़ाया गया और किसानो के बिना जानकारी के कई किसानो के नाम पर 01 करोड़ 77 लाख का केसीसी लोन निकाला गया। फर्जीवाड़ा में सहकारी समिति केना के तरकालीन समिति प्रभारी भीष्मदेव पटेल, तोरेसिंहा ब्रांच के तत्कालीन सुपरवाइजर श्याम सुन्दर पटेल वर्तमान सुपरवाइजर राजकुमार प्रधान और तोरेसिंहा ब्रांच मैनेजर युवराज नायक,कनिष्ट लोपिक हीरा सिंह ध्रुव प्रभारी लेखापाल खिलेश्वर साहू, सभी इस फर्जीवाड़े में शामिल थे। महासमुंद कलेक्टर श्री विनय कुमार लंगेह ने पुरे मामले की बारीकी से जांच के लिए तीन सदस्यों की टीम बनायीं थी। जांच दल ने मामले का गहराई से जांच किया और जांच में पाया कि 2023 – 24 में KCC लोन फर्जीवाड़ा में 01 करोड़ 77 लाख का केसीसी लोन फर्जीवाड़ा किया गया है। इस फर्जीवाड़ा में आरोपित सभी ने मिलकर एक संगठित और शातिर तरीके से किसानो के नाम पर किसानो के बिना सहमति, बिना जानकारी के 01 करोड़ 77 लाख का केसीसी लोन निकाला गया। जांच में किसानों ने स्पष्ट रूप से बयान दिया है कि हमारे जानकारी के बिना ही हमारे नाम से KCC लोन निकाला गया है कुछ किसान ऐसे भी है जिनकी मौत हो गयी है उसके बाद भी उनके नाम से भी KCC लोन निकाला गया है। कुछ लोग दूसरे समिति क्षेत्र के है उनके नाम से भी लोन निकल लिया गया है।
जांच में आरोपित सभी के फर्जीवाड़ा में शामिल होने की सबुत जांच रिपोर्ट में आने के बाद अब जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित रायपुर के अधिकारियों द्वारा क्या तोरेसिंहा बैंक के 05 कर्मचारी तत्कालीन सुपरवाइजर श्याम सुन्दर पटेल, वर्तमान सुपरवाइजर राजकुमार प्रधान, तोरेसिंहा ब्रांच मैनेजर युवराज नायक ,कनिष्ट लोपिक हीरा सिंह ध्रुव प्रभारी लेखापाल खिलेश्वर साहू को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। किसानो के नाम पर 01 करोड़ 77 लाख के 420 के इतने बड़े मामले सिर्फ निलंबन करके बचाया जा रहा है। इस अभयदान के पीछे भी एक कहानी है। इस पुरे मामले में केना के तत्कालीन समिति प्रभारी भीष्मदेव पटेल पर कार्यवाही के लिए जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने महासमुंद जिले के उप पंजीयक सहकारी सस्थाएं को पत्र लिखकर कार्यवाही करने कहा गया है जांच में दोषी सभी पाए गए है। बाकी बैंक के 5 कर्मचारियों को सिर्फ निलंबन कर अधिकारी अपने कर्तव्यों से इतिश्री कर रहे है।
समझिए ये केसीसी लोन कैसे मिलता है किन किन कर्मचारियों और अधिकारियों से होकर लोन की फाइल गुजरती है और लोन मिलता है
1- समिति प्रभारी, जो किसानों के केसीसी लोन के लिए किसानों से कागजात लेता है जिसमे किसान किताब [ ऋण पुस्तिका ], बी वन भाग 2, आधार कार्ड, बैंक पासबुक मुख्य है, इसके बाद ऋण पत्रक भरकर सुपरवाइजर को देता है।
2- सुपरवाइज़र, जो किसानों ऋण के लिये आये कागजात को बारीकी से चेक करता है, बी वन भाग 2, किसान किताब [ ऋण पुस्तिका ],में किसान के पास खेती की कितनी जमीन है क्योकि किसान किताब [ ऋण पुस्तिका ] इसकी पूरी जानकारी रहती है। सुपरवाइजर इसे बैंक के ब्रांच मैनेजर को भेजता है।
3- सम्बंधित सहकारी समिति के बैंक के ब्रांच मैनेजर, जो सुपरवाइजर से मिले लोन के कागजात को फिर चेक करता है उसके बाद लोन दिया जाता है। जिसमे विशेष रूप से किसान किताब [ ऋण पुस्तिका ], बी वन भाग 2 को चेक करता है कि किसान के पास कितना खेती की ज़मीन है क्योकि उसी आधार पर उसे केसीसी लोन दिया जाता है।
420 जैसे गंभीर मामले में सिर्फ निलंबन कर क्या उन्हें अभयदान दिया जा रहा है। इन कर्मचारियों ने मिलकर गरीब किसानों के नाम पर लोन लेकर उन्हें बैंक डिफाल्टर बना दिया है बैंक डिफाल्टर होने से कई किसानों को समिति से खाद, बीज तक नही मिल पा रहा है।
