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दही हांडी हमें एकता, सहयोग और टीम भावना की शक्ति का संदेश देती है : मुख्यमंत्री साय

IBN24 Desk: रायपुर (छत्तीसगढ़) मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के गुढ़ियारी स्थित अवधपुरी मैदान में आयोजित विशाल दही हांडी उत्सव में शामिल हुए। उत्सव में उमड़े जनसमूह के बीच मुख्यमंत्री ने गोविंदाओं की टोलियों का उत्साहवर्धन किया और प्रदेशवासियों को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि दही हांडी का उत्सव भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं की स्मृतियों को जीवंत करने के साथ हमें एकता, सहयोग और टीम भावना की शक्ति का संदेश भी देता है। माखन चुराने वाले नटखट कान्हा की बाल लीलाएं आज भी हर मन में आनंद, प्रेम और भक्ति का भाव जगाती हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि दही हांडी केवल उत्सव नहीं, बल्कि सामूहिकता की शक्ति का सुंदर प्रतीक है। हांडी तक पहुंचने वाला गोविंदा अकेले उस ऊंचाई तक नहीं पहुंचता। उसके नीचे खड़े प्रत्येक साथी का विश्वास, सहयोग और सामर्थ्य उसे ऊपर तक पहुंचाता है। जब सभी एक लक्ष्य के लिए मिलकर प्रयास करते हैं, तभी कठिन से कठिन लक्ष्य भी हासिल किया जा सकता है। यही संदेश हमें समाज और प्रदेश के विकास के लिए भी प्रेरित करता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का संपूर्ण जीवन हमें जीवन जीने की कला और अपने कर्तव्य के प्रति समर्पण की सीख देता है। ग्वालबालों के प्रिय सखा के रूप में उन्होंने प्रेम और मित्रता का संदेश दिया, द्वारका के नेतृत्वकर्ता के रूप में कुशल नेतृत्व का आदर्श प्रस्तुत किया और कुरुक्षेत्र में सारथी बनकर पूरी मानवता को कर्मयोग का मार्ग दिखाया। भगवान श्रीकृष्ण ने अपने जीवन की प्रत्येक भूमिका को पूर्ण जिम्मेदारी के साथ निभाया। उनका जीवन हमें परिस्थितियां कैसी भी हों, अपने कर्तव्य पथ पर अडिग रहने की प्रेरणा देता है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारा प्रदेश प्रभु श्रीराम का ननिहाल और माता कौशल्या की जन्मभूमि है। भगवान श्रीराम ने वनवास का लंबा समय छत्तीसगढ़ की पुण्य धरा पर बिताया। आज जिस अबूझमाड़ क्षेत्र को हम जानते हैं, वह रामायण काल के विशाल दंडकारण्य का हिस्सा रहा है। प्रभु श्रीराम से जुड़ी स्मृतियां और स्थल छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को विशेष गौरव प्रदान करते हैं।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और श्रद्धालुओं को प्रमुख तीर्थ स्थलों से जोड़ने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। श्री रामलला दर्शन योजना के माध्यम से प्रदेश के श्रद्धालुओं को अयोध्याधाम में प्रभु श्रीरामलला के दर्शन का अवसर मिल रहा है। अब तक छत्तीसगढ़ के 50 हजार से अधिक श्रद्धालु इस योजना के माध्यम से अयोध्याधाम जाकर रामलला के दर्शन कर चुके हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के माध्यम से राज्य के वृद्धजनों को देश के प्रमुख तीर्थ स्थलों की यात्रा कराई जा रही है। योजना के अंतर्गत अब तक 10 हजार से अधिक श्रद्धालु विभिन्न तीर्थ स्थलों के दर्शन कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति में गौमाता का विशेष स्थान है। राज्य सरकार सुरभि गोधाम योजना के माध्यम से गौवंश के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में भी कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ देवी-देवताओं की कृपा से समृद्ध पुण्यभूमि है। प्रदेश पर भगवान भोलेनाथ की विशेष कृपा रही है। कबीरधाम में भोरमदेव और राजिम में कुलेश्वर महादेव जैसे प्राचीन एवं प्रसिद्ध शिव मंदिर हमारी आस्था के प्रमुख केंद्र हैं। जशपुर का मधेश्वर पहाड़ अपनी अद्भुत प्राकृतिक संरचना के कारण विशेष पहचान रखता है और इसे विश्व के सबसे बड़े प्राकृतिक शिवलिंग के रूप में मान्यता मिली है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती पर मातृशक्ति के अनेक प्रसिद्ध शक्तिपीठ और आस्था केंद्र भी विद्यमान हैं। डोंगरगढ़ में मां बम्लेश्वरी, रतनपुर में मां महामाया, दंतेवाड़ा में मां दंतेश्वरी और चंद्रपुर में मां चंद्रहासिनी के धाम प्रदेश की समृद्ध आध्यात्मिक परंपरा के प्रतीक हैं। हमारी सरकार इस गौरवशाली धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन और इसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।

 

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