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जाड़ामुड़ा धान खरीदी फर्जीवाड़ा में एक और अहम् खुलासा, पिछले साल भी किया गया था फर्जी रकबे में करोड़ो की धान खरीदी, पिछले बार मामला पकड़ में नहीं आने पर इस बार फर्जी रकबे को और बढ़ाया गया।

 IBN24 Desk : महासमुंद [ छत्तीसगढ़ ] महासमुन्द जिले के पिथौरा ब्लाक के प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति के धान खरीदी में एक के बाद एक फर्जीवाड़ा का खुलासा हो रहा है। पिछले अंक में आपने पढ़ा कि खरीदी वर्ष 2023-24 किस तरह से समिति के कर्मचारियों ने अपने रिश्तेदारों और अपने घनिष्ट परिचित किसानो का रकबा फर्जी तरीके से बढ़ाया, जिसमे फर्जी तरीके से धान की खरीदी हो रही है। 

इस खबर की पड़ताल में एक और अहम् खुलासा हुआ है पिछले साल यानी धान खरीदी वर्ष 2022-23 में भी यहाँ के समिति / प्रभारी उमेश भोई और कम्प्यूटर आपरेटर मनोज प्रधान ने अपने रिश्तेदारों और अपने घनिष्ट परिचित किसानो का रकबा फर्जी तरीके से बढ़ाया था जिसमे करोडो की फर्जी तरीके से धान की खरीदी की गए है। 

ये मामला पिछले साल 2022-23 का है 

प्रकरण 1. रामप्रसाद पिता नंदलाल इनके पास 0.9700 हेक्टेयर यानी 02 एकड़ 45 डिसमिल खेती की जमीन है।

(जमीन संबंधी प्रपत्र)

इसे साल 2022-23 में फर्जी तरीके से बढ़ाकर 7.1700 किया गया।

(वर्ष 2022-23 में रकबा पंजीयन प्रपत्र)

वर्ष 2023-24 इसके रकबे को फिर फर्जी तरीके से बढ़ाया गया और 14.3300 हेक्टेयर यानी 36 एकड़ किया गया। 

(वर्ष 2023-24 में रकबा पंजीयन प्रपत्र)

प्रकरण 02  – दासरथी पिता ईश्वर इनके पास 3.8300 हेक्टेयर यानि 9 एकड़ 57 डिसमिल खेती की जमीन है।

(जमीन संबंधी प्रपत्र)

इसे साल 2022-23 में फर्जी तरीके से बढ़ाकर 8.1700 किया गया था।

(वर्ष 2022-23 में रकबा पंजीयन प्रपत्र)

 वर्ष 2023-24 इसके रकबे को फिर फर्जी तरीके से बढ़ाया गया और 14.2500 हेक्टेयर यानी 35 एकड़ 62 डिसमिल किया गया है।  

(वर्ष 2023-24 रकबा पंजीयन प्रपत्र)

प्रकरण 03 – गौतम बरिहा पिता कुसनो इनके पास 0.2900 हेक्टेयर यानी 73 डिसमिल खेती की जमीन है। 

(जमीन संबंधी प्रपत्र)

इसे साल 2022-23 में फर्जी तरीके से बढ़ाकर 6.6700 हेक्टेयर यानी 16 एकड़ 68 डिसमिल किया गया था।

(वर्ष 2022-23 में रकबा पंजीयन प्रपत्र)

 वर्ष 2023-24 इसके रकबे को फिर फर्जी तरीके से बढ़ाया गया और7.1800हेक्टेयर यानी 17 एकड़ 95 डिसमिल किया गया है।

(वर्ष 2023-24 में रकबा पंजीयन प्रपत्र)

इसी तरह 2022 -23 में बोदराम ,यशवंत, हितेश, मनोहर सहित कई किसानो का रकबा फर्जी तरीके से बढ़ाया गया था। पिछले साल मामला उजागर नहीं होने पर फर्जीवाड़ा करने वालो बेख़ौफ़ होकर फिर से उन लोगो का रकबा बढ़ा दिया है जिस पर धान की खरीदी हो रही है। पिछले साल भी समिति प्रभारी/ प्रबंधक उमेश भोई और कम्प्यूटर आपरेटर मनोज प्रधान ही थे जो इस साल भी रहे है।  

मामला उजागर होने पर जिला प्रशासन खरीदी वर्ष 2023 -24 में हुए फर्जीवाड़ा की जांच कर रही है। अब 2022-23 के फर्जीवाड़े के इस नए खुलासे के बाद एक और जांच होगी। 

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