IBN24 Desk : महासमुंद (छत्तीसगढ़) महासमुंद जिला फर्जीवाड़ा, भष्ट्राचार का महासमुन्द्र है यहाँ हर रोज नित नए फर्जीवाड़ा उजागर होता है। ताजा मामला महासमुंद जिले के सराईपाली ब्लाक के सेवा सहकारी समिति केना का है जहाँ किसानो के रकबा में कूट रचना कर उनके रकबे को फर्जी ढंग से बढ़ाया गया और करोड़ो रूपये केसीसी लोन निकाला गया। फर्जीवाड़ा में सहकारी समिति के प्रभारी, तोरेसिंहा ब्रांच के सुपरवाइजर और तोरेसिंहा ब्रांच मैनेजर सभी की संलिप्तता नजर आ रही है।

केसीसी लोन फर्जीवाड़ा 2023 – 24 का है इस फर्जीवाड़ा में किसानो के रकबे में फर्जीवाड़ा किया गया है. जिन किसानो के नाम पर 1 से 3 एकड़ तक खेती की जमीन है उसे कूट रचना कर 20 – 25 एकड़ तक बढ़ाया गया और बड़े हुए रकबे के हिसाब से तोरेसिंहा सहकारी बैंक से केसीसी लोन निकाला गया है।
सहकारी समिति केना के कई किसानो ने बताया कि हम लोग लोन के लिए जाते है तो कई तरह के नियम कानून बताया जाता है लेकिन 2023-24 कई लोगो का केसीसी लोन के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा किया गया है इस फर्जीवाड़ा में केना सहकारी समिति के प्रभारी भीष्मदेव पटेल, तोरेसिंहा ब्रांच के तत्कालीन सुपरवाइजर श्याम सुन्दर पटेल वर्तमान में में पदस्त सुपरवाइर राज कुमार प्रधान और तोरेसिंहा ब्रांच के ब्रांच मैनेजर युवराज नायक शामिल है। इन्हीं लोगो ने मिलकर फर्जीवाड़ा कर शासन को करोडो का चुना लगाया है और किसनों को बिना कर्ज लिए कर्जदार बनाया है। किसानो ने उनके नाम भी बताये कि जिनके नाम पर खेती की जमींन कम है उसे कई गुना बढाकर केसीसी लोन निकला गया है।
प्रकरण क्रमांक 01 – सचिदानंद पिता बालमकुन्द प्रधान नानकपाली इनके पास कुल खेती की ज़मींन 0. 8000 हेक्टेयर यानी 02 एकड़ है जिसे बढ़ाकर 7.69 हेक्टेयर यानी 19 एकड़ किया गया और 203016 रुपये नगद लोन निकाल लिया गया। जबकि किसान को लोन सम्बन्धी कोई जानकारी ही नहीं , न ही किसान लोन के लिए आवेदन दिया था, न ही उसने विड्रॉल भरा है, न ही वह बैंक गया है उसके बाद भी उसके नाम से लोन निकाल लिया गया !
प्रकरण क्रमांक 02 – भीष्मनाद पिता डिग्रीलाल, टेंगनापाली के पास कुल कुल खेती की ज़मींन 2.1700 हेक्टेयर यानी 5 एकड़ 42 डिसमिल जमीन है इसे कूटरचना कर 9.24 हेक्टेयर यानी 23 एकड़ किया गया है। और 23 एकड़ के हिसाब से 243936 रुपये केसीसी लोन निकाला गया है।

प्रकरण क्रमांक 03 – गोपाल नायक पिता सुरेश नायक इनके पास कुल खेती की ज़मींन 0.6400 हेक्टेयर है यानी 1 एकड़ 6 डिसमिल इनके नाम पर 385599 रुपये केसीसी लोन निकाल लिया गया।

प्रकरण क्रमांक 04 – उमा / वासुदेव इनके पास कुल खेती की ज़मींन 0.1400 हेक्टेयर है यानि 35 डिसमिल है इनके नाम पर 301791 रुपये केसीसी लोन निकाला गया है।

प्रकरण क्रमांक 05 – उत्तर कुमार पिता श्याम सुन्दर भोई के पास खेती की जमीन 0.2400 हे हेक्टेयर यानी 60 डिसमिल है इनके नाम पर 383193 रुपये केसीसी लोन निकाला गया है।

इसी तरह, लता /गोवर्धन, पुष्पा/ ललित, उद्ध/बिहारी, ऐसे तमाम नाम है जिनके खेती के रकबे में कूटरचना कर रकबा बढ़ाया गया है। सही तरीके से जांच की जाएगी तो 60 से 70 नाम सामने आएंगे जिनके नाम पर फर्जी तरीके से करोडो का केसीसी लोन निकाला गया है। किसानों के बताये अनुसार कुछ किसान तो दूसरे समिति के है जिनका केसीसी लोन केना समिति से पास हुआ है।
2023 -24 बैंक द्वारा एक हेक्टेयर में 26400 नगद और 17600 सामग्री के लिए कुल 44000 प्रति हेक्टेयर, अगर एकड़ में बात करे तो 17600 प्रति एकड़ के हिसाब से मिलता था। लेकिन कूट रचना कर इन किसानो का रकबा लगभग 20 से 25 एकड़ तक बढ़ाया गया और उस बढे हुए रकबे के हिसाब से केसीसी लोन निकाल लिया गया।
समझिए ये केसीसी लोन कैसे मिलता है किन किन कर्चारियों और अधिकारियो से होकर लोन की फ़ाइल गुजरती है और लोन मिलता है
1- समिति प्रभारी, जो किसानों के केसीसी लोन के लिए किसानों से कागजात लेता है जिसमे किसान किताब [ ऋण पुस्तिका ], बी वन भाग 2, आधार कार्ड, बैंक पासबुक मुख्य है, इसके बाद ऋण पत्रक भरकर सुपरवाइजर को देता है।
2- सुपरवाइज़र, जो किसानों ऋण के लिये आये कागजात को बारीकी से चेक करता है, बी वन भाग 2, किसान किताब [ ऋण पुस्तिका ],में किसान के पास खेती की कितनी जमींन है क्योकि किसान किताब [ ऋण पुस्तिका ] इसकी पूरी जानकारी रहती है। सुपरवाइजर इसे बैंक के ब्रांच मैनेजर को भेजता है।
3- सम्बंधित सहकारी समिति के बैंक के ब्रांच मैनेजर, जो सुपरवाइजर से मिले लोन के कागजात को फिर चेक करता है उसके बाद लोन दिया जाता है। जिसमे विशेष रूप से किसान किताब [ ऋण पुस्तिका ], बी वन भाग 2 को चेक करता है कि किसान के पास कितना खेती की ज़मीन है क्योकि उसी आधार पर उसे केसीसी लोन दिया जाता है
केना सहकारी समिति के किसानों ने आरोप लगाया है कि इस केसीसी लोन फर्जीवाड़े में तत्कालीन समिति प्रभारी भीष्मदेव पटेल, पहले पदस्त रहे सुपरवाइजर श्याम सुन्दर पटेल और वर्तमान सुपरवाइजर राज कुमार प्रधान और तोरसिंहा ब्रांच के बैंक मैनेजर युवराज नायक शामिल है इन लोगो ने मिलकर फर्जीवाड़ा किया है। इनके बिना मिलीभगत के कम खेती की जमीन वाले किसानो को ज्यादा केसीसी लोन मिलना संभव ही नहीं है। सुपरवाइजर और ब्रांच मैनेजर को इन सब की जानकारी होते हुए गलत तरीके से ज्यादा केसीसी निकाला गया है।
सवाल नम्बर – 1 अगर किसानों के ऋण पुस्तिका में रकबा कम है तो इसे किसने कूटरचना कर बढ़ाया जिस आधार पर केसीसी लोन हुआ।
सवाल नम्बर 2 -तोरेसिंहा सहकारी बैंक के तत्कालीन सुपरवाइजर श्याम सुन्दर पटेल ने किसान के ऋण पुस्तिका में रकबा कम होने के बाद भी समिति प्रभारी द्वारा दिए ऋण पत्रक को मिलान क्यों नहीं किया। जब किसानों ने ऋण जमा नहीं किया तो वर्तमान सुपरवाइजर राजकुमार प्रधान ने रिकवरी के लिए नोटिस क्यों नहीं भेजा किसानों के घर ऋण वसूली के लिए क्यों नहीं गए। जब वर्तमान सुपरवाइजर राजकुमार को फर्जी केसीसी ऋण निकाले जाने सम्बन्धी जानकारी थी तो उच्च कार्यालय को अवगत क्यों नहीं कराया। आखिर जानकर भी अनजान क्यों बने रहे।
सवाल नम्बर 3 – तोरेसिंहा सहकारी बैंक के ब्रांच मैनेजर युवराज नायक ने, ये जानते हुए भी कि ऋण पुस्तिका और बी वन भाग 2 में रकबा कम है लेकिन फर्जी तरीके से ज्यादा केसीसी लोन दिया ।
मतलब साफ़ है सब ने मिलकर इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया है और भोले भाले किसानो को बिना कर्ज लिए की कर्जदार बना दिया।
इस पूरे मामले में महासमुंद कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने कहा जांच के बाद कड़ी कार्यवाही की जाएगी।
