IBN24 Desk: रायपुर (छत्तीसगढ़) नवकार नगर स्थित श्री मुनि सुब्रत स्वामी जिनालय एवं मणिधारी दादाबाड़ी में आज 18 अक्टूबर से नवपद ओली तप आराधना शुरू होगी। पहले दिन 300 श्रद्धालु एक साथ आयंबिल तप करेंगे। यह आयोजन मुनि सत्त्वरत्न सागरजी और उनके साथ मौजूद साधु-संतों के सानिध्य में होगा।
26 अक्टूबर तक चलने वाले इस आयोजन में श्रद्धालु पूजा-पाठ, तप और प्रवचन में शामिल होंगे। इसके जरिए जैन धर्म की शिक्षाओं को समझने और जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी जाएगी।
आयंबिल जैन धर्म में तप करने का एक तरीका है। इसमें श्रद्धालु खाने-पीने की चीजों पर संयम रखते हैं और तय नियमों के अनुसार दिन में एक बार सादा भोजन करते हैं। इस भोजन में तेल, घी, दूध, दही, चीनी और मसाले जैसी चीजों का इस्तेमाल नहीं किया जाता।
इस तप का उद्देश्य स्वादिष्ट भोजन का मोह छोड़ना, अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण रखना और मन को शांत करना है। श्रद्धालु गुरुजनों के बताए नियमों के अनुसार तप करते हैं।
नौ दिनों में नौ पदों की होगी पूजा
नवपद ओली में नौ दिनों तक जैन धर्म के नौ पदों की पूजा की जाती है। इनमें अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और साधु शामिल हैं। बाकी चार पद सम्यग्दर्शन, सम्यग्ज्ञान, सम्यक्चारित्र और सम्यक्तप हैं।
इनका सरल अर्थ है सही बातों पर विश्वास करना, सही ज्ञान पाना, अच्छे काम करना और नियम के साथ तप करना। इन नौ पदों से श्रद्धालुओं को सच्चाई, ज्ञान, अच्छे आचरण और संयम के रास्ते पर चलने की सीख मिलती है।
श्रद्धालुओं से आराधना में शामिल होने की अपील
आयोजकों के अनुसार, हर पद जीवन में कुछ अच्छा अपनाने की सीख देता है। अरिहंत बुराइयों पर जीत पाने, सिद्ध मोक्ष प्राप्त करने, आचार्य अनुशासन रखने, उपाध्याय ज्ञान बढ़ाने और साधु त्याग व संयम का रास्ता दिखाते हैं।
वहीं, बाकी चार पद सही सोच, सही ज्ञान, अच्छे व्यवहार और आत्मसंयम का महत्व बताते हैं। आयोजकों ने श्रद्धालुओं से 18 से 26 अक्टूबर तक होने वाली पूजा और प्रवचन में शामिल होकर आराधना का लाभ लेने की अपील की है।
