IBN24 Desk: रायपुर (छत्तीसगढ़) मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित महतारी वंदन योजना जशपुर जिले की महिलाओं के लिए आर्थिक संबल का महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है। योजना शुरू होने के बाद मार्च 2024 से अगस्त 2026 तक जिले की महिलाओं के खातों में 639 करोड़ 54 लाख 55 हजार 550 रुपये की राशि अंतरित की जा चुकी है। जिले में औसतन 2 लाख 22 हजार से अधिक महिलाओं को हर माह योजना का लाभ मिल रहा है।
योजना के तहत पात्र महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। नियमित रूप से मिलने वाली इस राशि का उपयोग महिलाएं अपनी और परिवार की प्राथमिकताओं के अनुसार बच्चों की शिक्षा, पोषण, घरेलू आवश्यकताओं, बचत और स्वरोजगार में कर रही हैं। किसी मां के लिए यह राशि बच्चे की कॉपी-किताब और पढ़ाई का सहारा बनी है, तो किसी महिला ने इसे बेटी के भविष्य की बचत से जोड़ दिया है। कई महिलाएं इस राशि को अपनी आय के साथ जोड़कर छोटे व्यवसाय और आजीविका गतिविधियों को भी आगे बढ़ा रही हैं।
किसी के लिए बच्चों की पढ़ाई, तो किसी के लिए भविष्य की बचत
देवगुड़ा की हितग्राही परमिला प्रजापति बताती हैं कि महतारी वंदन योजना से मिलने वाली राशि से उन्हें अपने बच्चे की पढ़ाई और पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिल रही है। नियमित आर्थिक सहायता से घर के खर्च को व्यवस्थित करने में भी सहूलियत हो रही है।
पुरनानगर की एनीमा खलखो योजना से मिलने वाली राशि का उपयोग बच्चे की पढ़ाई और पोषण के साथ घरेलू जरूरतों को पूरा करने में करती हैं। खास बात यह है कि वे हर महीने 500 रुपये की बचत भी कर रही हैं। इस तरह योजना से मिली राशि उनके लिए वर्तमान जरूरतों को पूरा करने के साथ भविष्य के लिए आर्थिक आधार तैयार करने का माध्यम बन रही है।
बेटियों के बेहतर भविष्य के लिए सुकन्या समृद्धि में जमा कर रहीं राशि
महतारी वंदन से मिली आर्थिक सहायता को महिलाएं दीर्घकालीन बचत से भी जोड़ रही हैं। तपकरा क्षेत्र के बाधरकोना की विनीता बघेल और जशपुर की पार्वती सिंह अपनी बेटियों के नाम सुकन्या समृद्धि योजना में राशि जमा कर रही हैं। छोटी-छोटी नियमित बचत के माध्यम से उनका प्रयास बेटियों की उच्च शिक्षा और भविष्य की आवश्यकताओं के लिए आर्थिक आधार तैयार करना है।
महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने की दिशा में महतारी शक्ति ऋण योजना भी सहायक बन रही है। इसके माध्यम से पात्र महिलाओं को 25 हजार रुपये तक का ऋण निर्धारित शर्तों के अनुसार उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे वे छोटे व्यवसाय और आयमूलक गतिविधियों को आगे बढ़ा सकें।
सिलाई और छोटे व्यवसाय से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम
महतारी वंदन योजना का प्रभाव केवल घरेलू जरूरतों और बचत तक सीमित नहीं है। कई महिलाएं योजना से मिलने वाली राशि को अपनी आय के साथ जोड़कर स्वरोजगार को मजबूत कर रही हैं। जशपुर की ममता यादव सिलाई का कार्य करती हैं। वे बताती हैं कि सिलाई से होने वाली आय और महतारी वंदन की राशि से परिवार की जरूरतों को पूरा करने के साथ बच्चों के भविष्य के लिए भी बचत कर पा रही हैं।
इसी तरह श्रीमती सरिता यादव, श्रीमती अनीता सोनकर, श्रीमती बिरसमुनी सिंह, श्रीमती लक्ष्मी बाई और श्रीमती अनीशा बाई सहित जिले की अनेक महिलाएं सिलाई, छोटे व्यवसाय और अन्य आयमूलक गतिविधियों से जुड़कर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
महिलाओं के हाथ में आर्थिक संबल, पूरे परिवार को मिल रही मजबूती
महतारी वंदन योजना से मिलने वाली नियमित राशि महिलाओं को अपनी आवश्यकताओं और परिवार की प्राथमिकताओं के अनुसार आर्थिक निर्णय लेने का अवसर दे रही है। बच्चों की शिक्षा और पोषण हो, घरेलू जरूरतें हों, बेटी के भविष्य के लिए बचत हो या फिर स्वरोजगार को आगे बढ़ाने की कोशिश—महिलाएं अपनी परिस्थितियों के अनुरूप इस सहायता का उपयोग कर रही हैं।
जशपुर की इन महिलाओं की कहानियां बताती हैं कि नियमित आर्थिक सहायता जब बचत, शिक्षा और आजीविका से जुड़ती है, तो उसका प्रभाव पूरे परिवार तक पहुंचता है। महतारी वंदन योजना महिलाओं के लिए प्रतिमाह मिलने वाली आर्थिक सहायता के साथ भविष्य की बेहतर योजना बनाने, बचत की आदत विकसित करने और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का माध्यम बन रही है।
