IBN24 Desk: रायपुर (छत्तीसगढ़) पीएम मोदी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर आपत्तिजनक पोस्ट करने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे और जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के अध्यक्ष अमित जोगी के खिलाफ FIR दर्ज हुई है। पुलिस ने उनके घर में नोटिस चस्पा किया है।
जिसके बाद अमित जोगी ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर खुद को भगोड़ा बताए जाने पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि वे कानून से भाग नहीं रहे हैं। गुजरात पुलिस की सुरक्षा में हैं। 2 से 8 नवंबर तक मित्रों के आमंत्रण पर पहले से तय कार्यक्रम में शामिल होने आए हैं।
उन्होंने दावा किया कि उनके कार्यालय ने 30 अक्टूबर को ही छत्तीसगढ़ और गुजरात के पुलिस महानिरीक्षकों सहित संबंधित अधिकारियों को उनके कार्यक्रम की सूचना दे दी थी। जोगी ने सवाल उठाया कि जब उनसे व्यक्तिगत रूप से संपर्क किया जा सकता था, लेकिन उनके घर जाकर नोटिस चस्पा करने और उनकी मां-पत्नी को अपमानित किया गया।
राजनीतिक व्यंग्य को सांप्रदायिक अपराध बनाना लोकतंत्र पर हमला
अमित जोगी ने FIR में लगाई गई BNS की धारा 196 पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह धारा सांप्रदायिक घृणा फैलाने से जुड़ी है। इससे अच्छा तो देशद्रोह का आरोप लगा देते। न जज हैं, न सुनवाई और न सबूत।
जोगी ने कहा कि ‘ज्ञानू और जानू’ का मतलब बहुत साधारण था। आज चुनाव कराने से लेकर कौन वोट डालेगा, इसका अधिकार सिर्फ दो लोगों के पास है। जब तक यह व्यवस्था नहीं बदलेगी, चुनाव में भाग लेना उसे वैधता देने जैसा है।
उन्होंने कहा कि यह मामला सिर्फ उनके लिए नहीं, बल्कि उन सभी लोगों के लिए खतरनाक है, जो छत्तीसगढ़ में रहना और सांस लेना चाहते हैं। राजनीतिक व्यंग्य को सांप्रदायिक अपराध बनाना लोकतंत्र में असहमति के अधिकार पर हमला है।
अरस्तूफेनेस से लेकर विदूषक तक का दिया उदाहरण
अमित जोगी ने अपने वीडियो में राजनीतिक व्यंग्य के इतिहास का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि प्राचीन यूनान में पांचवीं शताब्दी ईसा पूर्व के नाटककार अरस्तूफेनेस ने अपने नाटक ‘नाइट्स’ में सीधे सत्ता में बैठे नेता क्लिओन पर प्रहार किया था। उस दौर में कॉमेडी ही स्वतंत्र प्रेस का काम करती थी।
उन्होंने भारतीय परंपरा का उदाहरण देते हुए कहा कि भरतमुनि के नाट्यशास्त्र में विदूषक को राजा का करीबी मित्र बताया गया है। उसका काम हास्य के जरिए राजा को सचेत रखना था। आज के विद्वान उसे भारत का पहला पॉलिटिकल कार्टूनिस्ट भी कहते हैं। केरल में यह परंपरा आज भी जीवित है, जहां कलाकार धार्मिक कथाओं के बीच सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर व्यंग्य करते हैं।
पार्टी के चुनाव नहीं लड़ने का ये कारण बताया
उन्होंने बताया कि करीब दो दशक तक मुख्यधारा की मीडिया का हिस्सा रहने के बाद अब वे उससे दूर हो गए हैं। फिलहाल जेनरेशन Z की नई दुनिया से नई भाषा में संवाद करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनका Gen Z Era अभी लोड हो रहा है और वे इससे तालमेल बैठाने में संघर्ष कर रहे हैं।
अमित जोगी ने अपील की है कि, पांच साल बाद होने वाले चुनाव में संदेशवाहक को नहीं, बल्कि संदेश को सुनें। उन्हें अब सुर्खियों की जरूरत नहीं है। पिछले 20 साल में वे सुर्खियों का अपना कोटा पूरा कर चुके हैं। आज उनसे बड़ा मुद्दा धांधलीयुक्त चुनाव प्रणाली है। इसी वजह से उनकी पार्टी ने 2024 से कोई चुनाव नहीं लड़ा है।
