Homeछत्तीसगढ़बस्तर के जैविक वनोपज को नई उड़ान

बस्तर के जैविक वनोपज को नई उड़ान

IBN24 Desk: रायपुर (छत्तीसगढ़) छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण, जैविक उत्पादों के संवर्धन और ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने की दिशा में दंतेवाड़ा जिले ने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के अंतर्गत गठित माँ दंतेश्वरी महिला किसान उत्पादक कंपनी लिमिटेड को वनोपज के लिए राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (एनपीओपी) के अंतर्गत जैविक प्रमाणीकरण प्राप्त हुआ है। यह प्रदेश में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गठित पहली किसान उत्पादक कंपनी है, जिसे वनोपज के लिए यह प्रमाणन मिला है। इस उपलब्धि से बस्तर के प्राकृतिक वनोपज को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने की नई राह खुली है।

उप मुख्यमंत्री तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री विजय शर्मा ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए माँ दंतेश्वरी महिला किसान उत्पादक कंपनी से जुड़ी सभी महिलाओं और बिहान मिशन की पूरी टीम को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार बस्तर के समग्र विकास के लिए स्थानीय संसाधनों, स्थानीय प्रतिभा और स्थानीय भागीदारी पर आधारित विकास मॉडल को आगे बढ़ा रही है। इस मॉडल में महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण आजीविका और प्राकृतिक संसाधनों का सतत उपयोग प्रमुख आधार हैं। माँ दंतेश्वरी महिला किसान उत्पादक कंपनी को मिला एनपीओपी प्रमाणपत्र इसी दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि बस्तर की धरती प्राकृतिक संपदा से समृद्ध है और यहां की महिलाएं पीढ़ियों से वनोपज के संग्रहण एवं संरक्षण का कार्य करती आ रही हैं। एनपीओपी प्रमाणन मिलने से उनके परिश्रम और पारंपरिक ज्ञान को औपचारिक पहचान मिलेगी। अब दंतेवाड़ा के प्रमाणित जैविक वनोपज को देश के बड़े बाजारों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने की संभावनाएं मजबूत होंगी। इससे संग्राहकों को उनके उत्पादों का बेहतर मूल्य मिलने और वनोपज आधारित अर्थव्यवस्था को नई गति प्राप्त होने की उम्मीद है।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि जैविक प्रमाणन केवल उत्पादों की गुणवत्ता की पहचान नहीं है, बल्कि यह बस्तर की महिलाओं की मेहनत और सामूहिक उद्यमशीलता को नई पहचान दिलाने का माध्यम भी है। वनोपज के प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, विपणन और निर्यात से जुड़ी गतिविधियों के विस्तार से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। इससे युवाओं को अपने गांव और क्षेत्र में ही काम के अवसर मिलेंगे तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था और अधिक मजबूत होगी।

श्री शर्मा ने कहा कि शासन की मंशा है कि बस्तर के ऐसे गांवों, जहां परंपरागत रूप से रासायनिक उर्वरकों और रसायनों का उपयोग नहीं किया गया है, वहां के कृषि उत्पादों और वनोपज को निर्धारित मानकों के अनुरूप जैविक प्रमाणीकरण से जोड़ा जाए। इससे बस्तर की प्राकृतिक और पारंपरिक उत्पादन प्रणाली को विशिष्ट पहचान मिलेगी। साथ ही स्थानीय समुदायों को उनके उत्पादों का उचित मूल्य, बेहतर बाजार और स्थायी आजीविका प्राप्त करने में सहायता मिलेगी। उन्होंने कहा कि ‘दण्डक ब्रांड’ बस्तर की मेहनतकश महिलाओं, समृद्ध जैव विविधता और स्थानीय उत्पादों को एक साझा पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments