Homeछत्तीसगढ़सेवा की कहानी

सेवा की कहानी

IBN24 Desk: रायपुर (छत्तीसगढ़) मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के सुशासन में नागरिक सेवाओं को सरल, सुगम और मितव्ययी बनाने के लिए किए जा रहे सुधारों का लाभ अब सीधे आम नागरिकों तक पहुंच रहा है। पंजीयन विभाग द्वारा पारिवारिक संपत्ति के हकत्यागनामा के पंजीयन शुल्क में की गई कमी ने परिवारों के लिए संपत्ति संबंधी प्रक्रिया को आसान बनाया है। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत विभाग से जुड़े हितग्राहियों से संवाद के दौरान गरियाबंद जिले के ग्राम कुम्ही निवासी किसान श्री रामशरण चंद्राकर ने इस बदलाव से मिली आर्थिक राहत का अनुभव साझा किया।

वित्त एवं पंजीयन मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में किए गए शुल्क सुधार के तहत संयुक्त परिवार के सदस्यों के बीच पारिवारिक हकत्यागनामा के पंजीयन शुल्क को संपत्ति के बाजार मूल्य के 0.8 प्रतिशत से घटाकर मात्र 500 रुपये किया गया है। इस निर्णय का प्रत्यक्ष लाभ किसान श्री रामशरण चंद्राकर को मिला। उन्हें हकत्यागनामा के पंजीयन में करीब 5,100 रुपये की बचत हुई।

बहन के नाम संपत्ति होने से कृषि कार्यों में आ रही थी परेशानी

श्री रामशरण चंद्राकर ने बताया कि परिवार की संपत्ति में उनकी बहन का नाम दर्ज होने के कारण कृषि से जुड़े कार्यों में उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता था। पारिवारिक हकत्यागनामा के माध्यम से संपत्ति संबंधी अधिकार की प्रक्रिया पूरी की गई। शुल्क में कमी के कारण जहां यह प्रक्रिया उनके लिए पहले की तुलना में काफी कम खर्च में पूरी हुई, वहीं करीब 5,100 रुपये की बचत भी हुई। उन्होंने बताया कि बची हुई राशि का उपयोग वे अपने कृषि कार्यों में कर सकेंगे।

500 रुपये शुल्क से परिवारों को मिली बड़ी राहत

राज्य शासन द्वारा पारिवारिक हकत्यागनामा के पंजीयन शुल्क में यह महत्वपूर्ण बदलाव परिवारों के लिए आर्थिक राहत के साथ-साथ संपत्ति संबंधी प्रक्रियाओं को सरल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। पहले 1संपत्ति के बाजार मूल्य के आधार पर 0.8 प्रतिशत शुल्क देना पड़ता था, जबकि अब निर्धारित शुल्क केवल 500 रुपये है। इससे संयुक्त परिवार के सदस्यों के बीच हकत्याग की प्रक्रिया कम खर्च में पूरी हो रही है।

किसान रामशरण की कहानी इसी बदलाव का जमीनी उदाहरण है। उनके लिए यह केवल पंजीयन शुल्क में कमी नहीं, बल्कि बची हुई राशि को खेती में लगाने का अवसर भी है। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत सामने आई यह कहानी बताती है कि सुशासन के तहत किए गए नीतिगत सुधार जब नागरिक की रोजमर्रा की जरूरत से जुड़ते हैं, तो उनका प्रभाव सीधे परिवार की आर्थिक स्थिति पर दिखाई देता है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments