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विजयादशमी सत्य और धर्म की विजय का पर्व, अपने भीतर की बुराइयों पर विजय पाकर प्रेम और सद्भाव के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है : मुख्यमंत्री श्री साय

IBN24 Desk: रायपुर (छत्तीसगढ़) मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज सारंगढ़ – बिलाईगढ़ जिले के नगर पंचायत बिलाईगढ़ के रैनीभाठा में आयोजित ऐतिहासिक राजशाही दशहरा उत्सव में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने क्षेत्रवासियों को विजयादशमी की शुभकामनाएं देते हुए बिलाईगढ़ के विकास और नागरिक सुविधाओं के विस्तार के लिए पांच महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। मुख्यमंत्री ने बिलाईगढ़ में अपर कलेक्टर कार्यालय खोलने, बस स्टैंड से हायर सेकेंडरी स्कूल तक तीन करोड़ रुपए की लागत से गौरव पथ निर्माण, राजमहल जाने वाले मार्ग पर पुल निर्माण, नगर पंचायत के वार्ड क्रमांक 15 में मुक्तिधाम तथा मां समलाई माता मंदिर के समीप डोम शेड निर्माण की घोषणा की।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि इन विकास कार्यों से बिलाईगढ़ में प्रशासनिक सुविधाओं के विस्तार के साथ नगरीय अधोसंरचना और जनसुविधाएं सुदृढ़ होंगी। अपर कलेक्टर कार्यालय खुलने से क्षेत्रवासियों को अपने प्रशासनिक कार्यों के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा और स्थानीय स्तर पर समस्याओं के त्वरित निराकरण में सुविधा होगी। तीन करोड़ रुपए की लागत से बनने वाला गौरव पथ नगर की सुंदरता बढ़ाने के साथ आवागमन को बेहतर बनाएगा। इसी तरह राजमहल मार्ग पर पुल, मुक्तिधाम और डोम शेड का निर्माण स्थानीय आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण होगा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने भगवान श्रीराम, माता सीता, पवनपुत्र हनुमान, मां जगदंबा, भारत माता और छत्तीसगढ़ महतारी के जयकारों के साथ अपने संबोधन की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि बिलाईगढ़ का ऐतिहासिक राजशाही दशहरा केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक आस्था और सामाजिक एकता की जीवंत अभिव्यक्ति है। राजपरिवार ने पीढ़ियों से इस गौरवशाली परंपरा को सहेजकर रखा है और आज भी क्षेत्रवासी उसी श्रद्धा और उत्साह के साथ इसमें सहभागी होते हैं। उन्होंने इस परंपरा को निरंतर आगे बढ़ाने के लिए राजपरिवार, आयोजन समिति और बिलाईगढ़वासियों को बधाई दी तथा आत्मीय स्वागत के लिए आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विजयादशमी अधर्म पर धर्म, अन्याय पर न्याय और असत्य पर सत्य की विजय का शाश्वत संदेश देती है। भगवान श्रीराम ने इसी दिन अहंकारी और अत्याचारी रावण का अंत कर धर्म की स्थापना की थी। हम हर वर्ष रावण के पुतले का दहन करते हैं, लेकिन विजयादशमी की वास्तविक सार्थकता तब है, जब हम अपने भीतर के काम, क्रोध, मद, लोभ और अहंकार रूपी रावण का भी अंत करें। प्रभु श्रीराम के आदर्श हमें मर्यादा, कर्तव्य, न्याय और लोककल्याण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। समाज में प्रेम, सद्भाव और भाईचारे को मजबूत करना ही इस महापर्व का सच्चा संदेश है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि भगवान श्रीराम और छत्तीसगढ़ का संबंध अत्यंत आत्मीय और प्राचीन है। छत्तीसगढ़ माता कौशल्या की जन्मभूमि और प्रभु श्रीराम का ननिहाल है। वनवास के दौरान प्रभु श्रीराम ने लंबा समय छत्तीसगढ़ के दंडकारण्य क्षेत्र में व्यतीत किया। शिवरीनारायण में माता शबरी की भक्ति और राजिम का पवित्र त्रिवेणी संगम हमारी इसी समृद्ध आध्यात्मिक विरासत के प्रतीक हैं। छत्तीसगढ़ में भगवान श्रीराम को भांजे के रूप में पूजने की अनूठी परंपरा आज भी हमारी संस्कृति में जीवंत है।

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