IBN24 Desk: रायपुर (छत्तीसगढ़) रायपुर में आयुष्मान भारत योजना के नाम पर निजी अस्पतालों में कथित गड़बड़ियों को लेकर आम आदमी पार्टी ने सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी ने स्वास्थ्य विभाग की जांच में दोषी पाए गए 16 निजी अस्पतालों के प्रबंधन के खिलाफ FIR दर्ज कर गिरफ्तारी की मांग की है। AAP नेताओं का आरोप है कि अस्पतालों ने एजेंटों के जरिए मरीजों को बुलाया, बिना जरूरत भर्ती किया और फर्जी दस्तावेजों के साथ इलाज के पैकेज में गलत कोडिंग कर सरकारी पैसे का भुगतान लिया।
AAP ने जिन 16 अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है, उनमें रायपुर के 8 अस्पताल शामिल हैं। पार्टी के मुताबिक, इनमें सुयश इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, एसके केयर अस्पताल, श्री अनंत साई अस्पताल, श्री महावीर अस्पताल, श्रीनिवास अस्पताल, वरदान अस्पताल, हेरिटेज अस्पताल और श्री रावतपुरा सरकार अस्पताल शामिल हैं।
इसके अलावा पल्स अस्पताल दुर्ग, नेताम अस्पताल एवं इन्फर्टिलिटी सेंटर कोंडागांव, हरि कृष्णा केयर अस्पताल कोरबा, स्वामी चंद्रशेखरानंद अस्पताल बस्तर, जय जगन्नाथ हेल्थकेयर कबीरधाम, अशोक प्रसूति मंदिर बिलासपुर, केयर एन क्योर मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल बिलासपुर और श्री शंकराचार्य इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस दुर्ग के नाम भी सूची में हैं।
पार्टी नेताओं ने बताया कि रायपुर के 8 अस्पतालों के प्रबंधन के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग को लेकर 3 नवंबर को पुलिस उपायुक्त पश्चिम को ज्ञापन दिया गया था।
1.5-1.5 करोड़ के ऑक्सीजन प्लांट बंद, हर महीने 3.5 लाख की खरीदी
प्रेस कॉन्फ्रेंस में AAP नेताओं ने सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि माना सिविल अस्पताल में 1.5 करोड़ रुपए की लागत से लगाया गया ऑक्सीजन प्लांट 3 साल से बंद है। वहीं जिला अस्पताल का 1.5 करोड़ रुपए का प्लांट 2021 से बंद पड़ा है।
आरोप है कि दोनों प्लांट बंद होने के कारण हर महीने करीब 3.5 लाख रुपए खर्च कर ऑक्सीजन खरीदी जा रही है। प्लांट दोबारा शुरू नहीं होने की वजह पूछने पर तकनीकी स्टाफ की कमी बताई जाती है। नेताओं ने कहा कि करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी प्लांट बंद रहना और लगातार ऑक्सीजन खरीदना जांच का विषय है।
660 करोड़ की खरीदी पर भी उठाए सवाल
AAP नेताओं ने CGMSC और NHM में 660 करोड़ रुपए की रीजेंट और मेडिकल उपकरण खरीदी में कथित गड़बड़ी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने सवाल किया कि इस मामले में तीन IAS अधिकारियों को निर्दोष पाए जाने के बाद सरकारी खजाने को हुए नुकसान की जिम्मेदारी किसकी है और जनता के पैसे का हिसाब कौन देगा?
पार्टी ने जशपुर जिले की एक घटना का हवाला देते हुए कहा कि दो दिन पहले एंबुलेंस नहीं मिलने के कारण गर्भवती महिला की मौत हो गई। नेताओं के मुताबिक, बगीचा विकासखंड का संबंधित स्वास्थ्य केंद्र डेढ़ साल से बंद है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के गृह जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की यह स्थिति है तो प्रदेश के बाकी हिस्सों का अंदाजा लगाया जा सकता है।
आंदोलन की चेतावनी
AAP नेताओं ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों के पद खाली हैं और जरूरी जांच मशीनें खराब पड़ी हैं। दूसरी ओर निजी अस्पतालों पर गरीबों के मुफ्त इलाज की योजना में गड़बड़ी करने के आरोप हैं। पार्टी ने सरकार से स्वास्थ्य व्यवस्था सुधारने और कथित अनियमितताओं में शामिल अस्पतालों के प्रबंधन पर आपराधिक मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। AAP ने चेतावनी दी है कि मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो पार्टी सड़क पर उतरकर आंदोलन करेगी।
