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आजादी के 75 साल बाद बस्तर, कोंडागांव और नारायणपुर के दूर-दराज गांवों में रहने वाले करीब 1500 आदिवासियों ने पहली बार ट्रेन में सफर किया

IBN24 Desk: दुर्ग (छत्तीसगढ़) आजादी के 75 साल बाद बस्तर, कोंडागांव और नारायणपुर के दूर-दराज गांवों में रहने वाले करीब 1500 आदिवासियों ने पहली बार ट्रेन में सफर किया। जिन लोगों ने अब तक सिर्फ रेलगाड़ी के बारे में सुना था, उन्होंने बुधवार को पहली बार ट्रेन में बैठकर सफर का अनुभव किया। उनके चेहरे पर खुशी, उत्साह और नई दुनिया को देखने की चमक साफ नजर आ रही थी।

इन आदिवासी महिला-पुरुषों के लिए रेलवे ने ताड़ोकी से दुर्ग तक विशेष मेमू ट्रेन चलाई। शुक्रवार को सुबह शुरू हुई यात्रा के बाद ट्रेन करीब 11 बजे दुर्ग स्टेशन पहुंची। स्टेशन पर यात्रियों का आत्मीय स्वागत किया गया। महिलाओं और पुरुषों के माथे पर तिलक लगाया गया और आरती उतारी गई। स्टेशन का माहौल उत्सव जैसा दिखाई दे रहा था। आज सभी आदिवासी दिल्ली पहुंचे हैं।

भोजन की भी की गई व्यवस्था

दुर्ग स्टेशन परिसर स्थित एमएफसी में यात्रियों के लिए भोजन की व्यवस्था भी की गई थी। सफर के बाद सभी ने एक साथ बैठकर भोजन किया। पहली बार ट्रेन में बैठने की खुशी उनके चेहरे पर साफ दिखाई दे रही थी। कई यात्रियों ने बताया कि उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि वे रेल में सफर करेंगे और इतने बड़े शहर तक पहुंचेंगे।

पहली बार देखा ट्रेन

गांवों से निकले कई लोग अपने साथ थाली, चादर और रोजमर्रा का सामान भी लेकर आए थे। उनके लिए यह यात्रा सिर्फ एक सफर नहीं, बल्कि जिंदगी का नया अनुभव बन गई। ट्रेन की खिड़की से बाहर बदलते दृश्य देखकर कई लोग उत्साहित नजर आए। कुछ यात्री मोबाइल से तस्वीरें लेते दिखे तो कई लोग पूरे रास्ते बाहर का नजारा देखते रहे।

बस्तर और आसपास के जिन इलाकों में लंबे समय तक डर, बंद रास्तों और अलगाव की बातें होती रही हैं, वहां के लोगों के लिए यह यात्रा खास मायने रखती है। पहली बार गांव से बाहर निकलकर शहरों की रौनक और रेल यात्रा का अनुभव उन्हें नई दुनिया से जोड़ता नजर आया।

 

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