Homeछत्तीसगढ़अधिक वर्षा की स्थिति में किसान लेही पद्दति से धान की करें...

अधिक वर्षा की स्थिति में किसान लेही पद्दति से धान की करें बुआई

IBN24 Desk: रायपुर (छत्तीसगढ़) छत्तीसगढ़ में बस्तर क्षेत्र के मार्ग से सामान्यतः 14 जून के आसपास मानसून वर्षा का आगमन होता है, किन्तु इस वर्ष अल नीनो के प्रभाव के कारण बस्तर में लगभग 10 दिन विलंब से मानसून आया है। वर्तमान में प्रदेश के समस्त कृषि जलवायु क्षेत्रों जैसे बस्तर का पठार, छत्तीसगढ़ का मैदान एवं छत्तीसगढ के उत्तरी पहाड़ी क्षेत्र में मानसून पहुंच गया है। सामान्यतः जून के माह में छत्तीसगढ़ में लगभग 21 से.मी. वर्षा होती है, किन्तु इस वर्ष जून के माह में 40 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। आगामी 8 जुलाई तक पूरे राज्य में व्यापक वर्षा होने का आसार हैं। वर्तमान में बिलासपुर एवं सरगुजा संभाग को छोड़कर पूरे प्रदेश में लगभग सामान्य वर्षा दर्ज की गई है। विगत पांच दिनों में उपरोक्त दोनों संभागों को छोड़कर शेष क्षेत्रों में व्यापक वर्षा हुई है। इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि मानसून के देरी से आने के पश्चात् भी विगत 1 जुलाई से 6 जुलाई तक छत्तीसगढ का मैदानी भाग एवं बस्तर का पठार में अधिक वर्षा होने के कारण मानसून का अब तक का कोटा लगभग पूरा हो चुका है। अतः इस प्रकार लगातार हो रही वर्षा को देखते हुए किसान बन्धुओं को सलाह दी जाती है कि खेतों में पर्याप्त पानी की उपलब्धता होने पर मचाई कर नर्सरी उपलब्ध होने पर रोपाई करें अथवा नर्सरी की अनुपलब्धता पर लेही विधि से अंकुरित बीजों को मचाई किये हुए खेतों में ड्रम सीडर एवं छिटकवा विधि से बुवाई करें। साथ ही नर्सरी एवं बीजों को कवकनाशी (कार्बेन्डाजिम) एवं जैव उर्वरकों से उपचारित कर रोपाई एवं बुवाई करें।

इस वर्ष अषाढ़ माह 1 जुलाई से प्रारंभ हुआ है। अषाढ़ माह से प्रारंभ होकर सावन मास की हरियाली अमावस्या अर्थात हरेली तिहार तक हम खरीफ फसल की बुआई एवं रोपाई कर सकते हैं। इस बार हरेली 12 अगस्त को मनाई जाएगी। जो किसान भाई धान की सीधी बुआई करते हैं उन्हें परामर्श है कि जमीन में बतर की स्थिति में 15 जुलाई तक धान की बुआई कर लेवें। रोपाई एवं बियासी पद्धति से धान की खेती करने वाले किसान भाई 30 जुलाई तक रोपाई एवं बियासी का कार्य कर लेवें। किसी असामान्य परिस्थिति के कारण विलंब होने से यदि आप हरेली तक भी बुआई रोपाई का कार्य करते हैं तो फसल के उत्पादन में ज्यादा नुकसान नहीं होगा

चूंकि इस बार मानसून विलंब से आया है इसलिए किसान भाईयों को सलाह दी जाती है कि इस वर्ष धान की शीघ्र एवं मध्यम अवधि में पकने वाली प्रजातियाँ जो कि 125-130 दिन तक पक जाती है जैसे- इन्द्रावती धान, बस्तर धान-1, छत्तीसगढ़ बारानी धान, इंदिरा एरोबिक धान, एम.टी.यू. 1010, एम.टी.यू. 1153, एम.टी.यू. 1156, एम.टी.यू. 1001, विक्रम टी.सी.आर., छत्तीसगढ़ धान 1919, छत्तीसगढ़ तेजस्वी धान, महामाया आदि का उपयोग करें। एक एकड़ में सीधी बुआई एवं बियासी के लिए 30 कि.ग्रा., रोपा पद्धति में 20 कि.ग्राम तथा हाइब्रिड प्रजाति के लिए 6 कि.ग्रा. बीज का उपयोग करें। जिन खेतों में अधिक जल भराव हो गया है तथा वर्षा रुक नहीं रही हो तो लेही पद्धति से धान की बोआई करें। इस विधि में धान के अंकुरित बीजों की खेत में बुआई की जाती है

बुआई के पूर्व बीज को कार्बेन्डाजिम या किसी अन्य कवकनाशी दवा से उपचारित कर लें। 1 किलो बीज के लिए ढाई ग्राम दवा का प्रयोग करें। भूमि में नाइट्रोजन फास्फोरस एवं पोटेशियम की पूर्ति के लिए जैव उर्वरकों का उपयोग करना चाहिए। धान में एजोस्पाइरिलम, पी.एस.बी., के.एस.बी. का उपयोग करना चाहिए। इन तीनों तरल जैव उर्वरकों की 2-2 मि.ली. मात्रा अर्थात 6 मि.ली. तरल पदार्थ 4 मि.ली. पानी में मिला लें। इस प्रकार तैयार 10 मि.ली. के घोल से 1 कि.ग्रा. धान बीज को उपचारित कर दें। यह उपचार पौधों को लगभग 12 कि.ग्रा. नाइट्रोजन 8 कि.ग्रा. फास्फोरस एवं 5 कि.ग्रा. पोटेशियम प्रति एकड़ प्रदान करेगा।

 

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments