IBN24 Desk: रायपुर (छत्तीसगढ़) राजधानी रायपुर में साइबर ठगों ने इंस्टाग्राम पर खुद को डॉक्टर बताकर 28 साल की महिला से दोस्ती की और विदेश से महंगे गिफ्ट भेजने का झांसा देकर 3.23 लाख रुपए की ठगी कर ली। आरोपी ने पहले सोशल मीडिया पर महिला का भरोसा जीता।
इसके बाद विदेश से गिफ्ट भेजने की बात कहकर एयरपोर्ट चार्ज, कस्टम ड्यूटी, टैक्स और प्रोसेसिंग फीस के नाम पर अलग-अलग किश्तों में 3.23 लाख रुपए अपने खाते में जमा करा लिए। ठगी का एहसास होने पर पीड़िता ने थाने में शिकायत दर्ज कराई। मामला पुरानी बस्ती थाना क्षेत्र का है।
पुलिस के अनुसार, कुशालपुर स्थित दंतेश्वरी मंदिर के पास रहने वाली 28 वर्षीय युवती की करीब दो वर्ष पहले drkhan666 नाम की इंस्टाग्राम आईडी के जरिए एक व्यक्ति से पहचान हुई थी।
खुद को डॉक्टर बताने वाले आरोपी ने पहले युवती से दोस्ती की और लगातार चैटिंग कर उसका भरोसा जीत लिया। बाद में उसने युवती का मोबाइल नंबर लेकर व्हाट्सऐप पर बातचीत शुरू कर दी। बातचीत के दौरान आरोपी ने युवती से उसकी तस्वीरें और वीडियो भी मंगवाए। खुद को विदेश में कार्यरत डॉक्टर बताया।
गिफ्ट भेजने का झांसा देकर शुरू की पैसों की मांग
कुछ समय बाद आरोपी ने महिला से कहा कि उसने विदेश से उसके लिए महंगे गिफ्ट भेजे हैं। इसके बाद उसने गिफ्ट की डिलीवरी के बहाने महिला से उसके घर का पता भी ले लिया। 4 जून को महिला के पास एक अन्य मोबाइल नंबर से कॉल आया।
कॉल करने वाले ने खुद को दिल्ली एयरपोर्ट की एक कंपनी का कर्मचारी बताते हुए कहा कि गिफ्ट छुड़ाने के लिए पहले 6 हजार रुपये जमा करने होंगे। इसके बाद महिला के व्हाट्सऐप पर एक क्यूआर कोड भेजा गया, जिस पर उसने ऑनलाइन भुगतान कर दिया।
कस्टम चार्ज के नाम पर लाखों रुपए की ठगी
पहला भुगतान मिलने के बाद साइबर ठगों ने कस्टम ड्यूटी, टैक्स, प्रोसेसिंग फीस और अन्य शुल्क का हवाला देकर महिला से लगातार अलग-अलग किस्तों में रकम जमा करानी शुरू कर दी। महिला ने 4 जून से 20 जून के बीच अपने बैंक ऑफ बड़ौदा खाते और च्वाइस सेंटर के माध्यम से विभिन्न यूपीआई ट्रांजेक्शन कर कुल 3,23,998 रुपए आरोपियों के खातों में भेज दिए।
गिफ्ट नहीं मिला, तब हुआ ठगी का अहसास
बार-बार भुगतान करने के बावजूद न तो महिला को कथित गिफ्ट मिला और न ही जमा की गई रकम वापस मिली। इसके बाद उसे अपने साथ साइबर ठगी होने का अहसास हुआ। महिला ने पुरानी बस्ती थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस मोबाइल नंबर, बैंक खातों और यूपीआई ट्रांजेक्शन के आधार पर आरोपियों की तलाश में जुटी है।
