IBN24 Desk: रायपुर (छत्तीसगढ़) रायपुर का चंदखुरी माता कौशल्या की जन्मभूमि और भगवान राम का ननिहाल माना जाता है। यहां दशहरे की परंपरा बाकी जगहों से अलग है। प्रदेशभर में विजयादशमी के दिन रावण दहन होता है, लेकिन चंदखुरी में ग्यारस यानी दशहरे के अगले दिन रावण दहन किया जाता है।
यह परंपरा सैकड़ों सालों से चली आ रही है। पहले यहां भव्य रामलीला का आयोजन होता था, जिसे देखने और दशहरा मनाने के लिए आसपास के गांवों के लोग बड़ी संख्या में पहुंचते थे। गांवों में दशमी को दशहरा मनाने के बाद लोग अगले दिन चंदखुरी आते थे। इसी वजह से यहां एक दिन बाद दशहरा मनाने की परंपरा शुरू हुई, जो आज भी जारी है।
गांवों के लोगों को जोड़ने के लिए बनी परंपरा
कौशल्या माता मंदिर के पुजारी रमेश शर्मा ने बताया कि चंदखुरी में ग्यारस के दिन दशहरा मनाया जाता है और रावण दहन होता है। छत्तीसगढ़ के दूसरे गांवों में विजयादशमी के दिन ही रावण दहन किया जाता है।
लेकिन चंदखुरी में पहले भव्य रामलीला का आयोजन होता था। आसपास के गांवों के लोग अपने यहां दशहरा मनाने के बाद अगले दिन यहां पहुंचते थे। इससे वे चंदखुरी की रामलीला और रावण दहन में भी शामिल हो पाते थे।
