शासकीय पट्टे की जमीन के राजस्व रिकॉर्ड में छेड़छाड़ का मामला, अनुविभागीय अधिकारी ने जारी किया निलंबन आदेश; अब अन्य जिम्मेदारों पर कार्रवाई की उठी मांग।
IBN24 Desk: महासमुंद (छत्तीसगढ़) महासमुंद जिले में शासकीय पट्टे की जमीन की कथित खरीदी-बिक्री को लेकर चर्चित सरीफाबाद जमीन घोटाला मामले में आखिरकार प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। पटवारी राजेंद्र कुमार डोंगरे को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), पिथौरा ने 7 अक्टूबर 2026 को बाकायदा आदेश जारी कर यह कार्रवाई की है। लंबे समय से सवालों के घेरे में रहे इस मामले में निलंबन की कार्रवाई को खबर का बड़ा असर माना जा रहा है।
जारी अधिकृत आदेश के अनुसार, ग्राम सरीफाबाद एवं भैंसानाला की भूमि से संबंधित शिकायत प्राप्त होने के बाद जांच की गई। इसमें सरीफाबाद स्थित खसरा नंबर 323, रकबा 1.65 हेक्टेयर सहित संबंधित भूमि के राजस्व अभिलेखों में छेड़छाड़ किए जाने का उल्लेख है। आदेश में छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 के नियम 3(2) के उल्लंघन का हवाला देते हुए छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 9 के तहत पटवारी राजेंद्र कुमार डोंगरे को निलंबित किया गया है। आदेश तत्काल प्रभावशील किया गया है।
सरीफाबाद में जमीन का खेल, अब कार्रवाई से मचा हड़कंप
सरीफाबाद का यह मामला केवल एक जमीन के रिकॉर्ड तक सीमित नहीं है। शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि क्षेत्र में शासकीय पट्टे की जमीन की खरीदी-बिक्री का खेल लंबे समय से चल रहा है। जमीन के वास्तविक स्वरूप और राजस्व अभिलेखों में दर्ज जानकारी को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आरोप यह भी हैं कि जमीन के कारोबार से जुड़े लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए राजस्व विभाग को गलत जानकारी दी गई। अब पटवारी के निलंबन के बाद इन आरोपों की निष्पक्ष और व्यापक जांच की मांग तेज हो गई है।
एक निलंबन से खत्म नहीं होंगे सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि राजस्व अभिलेखों में छेड़छाड़ हुई, तो इसकी जिम्मेदारी केवल एक पटवारी तक सीमित है या इस पूरे प्रकरण में अन्य स्तरों पर भी लापरवाही अथवा मिलीभगत हुई? जमीन के दस्तावेजों की जांच, नामांतरण की प्रक्रिया, रजिस्ट्री से संबंधित रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल से ही पूरे मामले की तस्वीर साफ हो सकेगी।
सरीफाबाद प्रकरण में अब प्रशासन के सामने यह चुनौती है कि कार्रवाई को केवल निलंबन तक सीमित न रखा जाए, बल्कि जांच के जरिए यह भी सामने लाया जाए कि शासकीय पट्टे की जमीन के कथित अवैध हस्तांतरण में किन-किन लोगों की भूमिका रही है। यदि जांच में अन्य जिम्मेदारों की संलिप्तता सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
अब किसकी बारी?
पटवारी राजेंद्र कुमार डोंगरे का निलंबन इस मामले में एक अहम प्रशासनिक कदम है, लेकिन इससे जुड़े सभी सवालों के जवाब अभी बाकी हैं। क्या राजस्व रिकॉर्ड की पूरी जांच होगी? क्या जमीन की खरीदी-बिक्री से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका सामने आएगी? और क्या जिम्मेदारी तय कर दोषियों पर भी कार्रवाई होगी?
सरीफाबाद जमीन प्रकरण ने राजस्व व्यवस्था की निगरानी और शासकीय भूमि की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब जिले की नजर इस बात पर है कि प्रशासन इस मामले की तह तक पहुंचकर पूरे कथित जमीन कारोबार का पर्दाफाश करता है या कार्रवाई केवल एक निलंबन तक सिमटकर रह जाती है।
