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सेवा की कहानी: पति के निधन के बाद चार बेटियों का भविष्य संवारने का उठाया बीड़ा, सक्षम योजना से आत्मनिर्भर बनीं इंदु लता गुप्ता

IBN24 Desk: रायपुर (छत्तीसगढ़) पति के निधन के बाद चार बेटियों की परवरिश, घर की जिम्मेदारी और उनके बेहतर भविष्य की चिंता। आर्थिक कठिनाइयों के बीच एक मां के सामने कई चुनौतियां थीं, लेकिन उन्होंने परिस्थितियों के आगे हार नहीं मानी। बेटियों को अच्छी शिक्षा दिलाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के संकल्प के साथ उन्होंने स्वरोजगार की राह चुनी। यह प्रेरक कहानी सरगुजा जिले की श्रीमती इंदु लता गुप्ता की है, जिन्होंने छत्तीसगढ़ महिला कोष की सक्षम योजना से मिले एक लाख रुपये के ऋण की सहायता से डेयरी व्यवसाय शुरू कर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाया है। आज उनकी एक बेटी मेडिकल कॉलेज में पढ़ रही है, दूसरी इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त कर रही है और दो अन्य बेटियां भी अपनी स्कूली शिक्षा जारी रखे हुए हैं।

इंदु लता की सफलता केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता की कहानी नहीं, बल्कि एक मां के संघर्ष, साहस और बेटियों के उज्ज्वल भविष्य के प्रति समर्पण की मिसाल है। सक्षम योजना से मिला आर्थिक सहयोग उनके लिए आजीविका का साधन बनने के साथ बेटियों की उच्च शिक्षा को आगे बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण सहारा साबित हुआ है।

पति के निधन के बाद बढ़ीं जिम्मेदारियां, बेटियों की पढ़ाई जारी रखना था सबसे बड़ा संकल्प

इंदु लता गुप्ता बताती हैं कि पति के निधन के बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई थी। चार बेटियों की परवरिश और घर का खर्च चलाना आसान नहीं था। नियमित आय का कोई साधन नहीं होने के कारण परिवार की दैनिक जरूरतें पूरी करने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।

इन परिस्थितियों में उन्हें सबसे अधिक चिंता बेटियों की शिक्षा और उनके भविष्य की होती थी। वे चाहती थीं कि आर्थिक परेशानियों के कारण किसी भी बेटी की पढ़ाई अधूरी न रह जाए। इसके लिए उन्होंने स्वयं कुछ काम शुरू करने का निर्णय लिया, ताकि परिवार की आजीविका चलाने के साथ बेटियों की शिक्षा का खर्च भी उठा सकें।

इसी दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के माध्यम से उन्हें छत्तीसगढ़ महिला कोष की सक्षम योजना के बारे में जानकारी मिली। योजना के अंतर्गत स्वरोजगार शुरू करने के लिए कम ब्याज पर ऋण उपलब्ध होने की जानकारी ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने की नई राह दिखाई।

एक लाख रुपये के ऋण से खरीदीं दो भैंसें, डेयरी व्यवसाय से बदली आर्थिक स्थिति

इंदु लता गुप्ता ने सक्षम योजना के अंतर्गत एक लाख रुपये का ऋण प्राप्त किया। इस राशि में अपनी बचत के पैसे मिलाकर उन्होंने दो भैंसें खरीदीं और डेयरी व्यवसाय की शुरुआत की।

शुरुआत में परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारना उनका मुख्य उद्देश्य था। उन्होंने पशुपालन को आजीविका का माध्यम बनाया और मेहनत के साथ डेयरी व्यवसाय को आगे बढ़ाया।

वर्तमान में उनकी दोनों भैंसों से प्रतिदिन लगभग 20 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है। दूध उत्पादन से मिलने वाली आय परिवार के भरण-पोषण और बेटियों की पढ़ाई में सहायक बन रही है।

इंदु लता बताती हैं कि पहले घर की छोटी-छोटी जरूरतें पूरी करने के लिए भी आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता था। अब डेयरी व्यवसाय से आय का साधन उपलब्ध होने के कारण परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है। इससे उन्हें बेटियों की शिक्षा और घरेलू आवश्यकताओं का खर्च उठाने में मदद मिल रही है।

मां की मेहनत लाई रंग, एक बेटी मेडिकल कॉलेज में तो दूसरी इंजीनियरिंग की कर रही पढ़ाई

इंदु लता गुप्ता के जीवन की सबसे बड़ी खुशी उनकी बेटियों की शिक्षा है। आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने बेटियों की पढ़ाई को हमेशा प्राथमिकता दी।

डेयरी व्यवसाय से आर्थिक संबल मिलने के बाद उन्होंने बेटियों की शिक्षा को आगे बढ़ाया। आज उनकी एक बेटी मेडिकल कॉलेज में अध्ययनरत है और डॉक्टर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही है। दूसरी बेटी इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही है, जबकि दो अन्य बेटियां स्कूली शिक्षा प्राप्त कर रही हैं।

 

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