IBN24 Desk: रायपुर (छत्तीसगढ़) सुबह होते ही सिर पर घड़ा और हाथ में बाल्टी लेकर पानी की तलाश में निकलना ग्राम मोहनटोला की महिलाओं की रोजमर्रा की मजबूरी हुआ करती थी। कई बार नदी, झरने और हैंडपंप तक पहुंचने में घंटों लग जाते थे। गर्मी के दिनों में यह परेशानी और बढ़ जाती थी। लेकिन आज वही मोहनटोला जल जीवन मिशन की बदौलत बदलाव की नई कहानी लिख रहा है। अब गांव के हर घर तक नल के माध्यम से शुद्ध पेयजल पहुंच रहा है और ग्रामीणों की जिंदगी में सुख, सुविधा और सम्मान की नई धारा बह रही है।
विकासखंड भरतपुर से लगभग 25 किलोमीटर दूर स्थित मोहनटोला की आबादी 986 है। बड़काटोला, बहेराटोला, छोटकापारा, महौरटोला और सुमनटोला सहित पांच बस्तियों वाले इस गांव में अधिकांश परिवार अनुसूचित जनजाति वर्ग से हैं। वर्षों तक यहां के लोग पेयजल के लिए प्राकृतिक जल स्रोतों पर निर्भर रहे। पानी लाने की जिम्मेदारी मुख्य रूप से महिलाओं और बच्चों के कंधों पर थी, जिससे उनका समय और श्रम दोनों खर्च होते थे।
भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन के तहत ग्राम मोहन टोला में एकल ग्राम जल प्रदाय योजना का सफल क्रियान्वयन किया गया। योजना पूर्ण होने के बाद गांव के सभी 212 परिवारों को घरेलू नल कनेक्शन उपलब्ध कराया गया। अब प्रत्येक घर में पर्याप्त मात्रा में सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध है। गांव की निवासी श्रीमती बब्बी बाई बताती हैं कि पहले पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। कई बार सुबह का अधिकांश समय केवल पानी लाने में ही निकल जाता था। अब घर में नल लग जाने से न केवल समय की बचत हो रही है, बल्कि परिवार के सभी सदस्यों को स्वच्छ पानी भी मिल रहा है। वे कहती हैं कि “अब पानी की चिंता नहीं रहती, बच्चों की पढ़ाई और घर के दूसरे कामों के लिए भी समय मिल जाता है।”
