IBN24 Desk: रायपुर (छत्तीसगढ़) खेतों में फसल कटाई के बाद बचने वाले अवशेषों को जलाने की परंपरा अब धीरे-धीरे बदल रही है। वैज्ञानिक कृषि तकनीकों के जरिए इन्हें मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने और खेती की लागत घटाने का प्रभावी साधन बनाया जा रहा है। इसी दिशा में कृषि विज्ञान केंद्र रायगढ़ ने निकरा परियोजना के तहत अंगीकृत ग्राम नावापारा में मल्चर एवं तोता हल आधारित फसल अवशेषों के इन-सीटू प्रबंधन का सफल प्रदर्शन किया।
कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. बी.एस. राजपूत के मार्गदर्शन में प्रगतिशील किसान होमेश्वर पटेल, तेजराम पटेल और रूपचंद पटेल के खेतों में आयोजित प्रदर्शन में किसानों को आधुनिक तकनीक की उपयोगिता से अवगत कराया गया। मक्का कटाई के बाद खेत में बचे डंठलों और अवशेषों को ट्रैक्टर चालित मल्चर से छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर खेत में फैलाया गया। इसके बाद तोता हल से जुताई कर इन्हें मिट्टी में मिला दिया गया।
